2024 के लिए अहम है कर्नाटक का विधानसभा चुनाव
कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम देश में एक नया राजनीति समीकरण बनाएगा। कांग्रेस जीतती है तो भाजपा के लिए दक्षिण राज्यों के दरवाजे बंद तो जायेंगे। अगर भाजपा जीतनी है तो मोदी को चुनौती देना 2024 में आसान नहीं होगा। कर्नाटक राज्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योकि उसकी सीमाएं केरल, तमिलनाडु, आंध प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र एवं गोवा से मिलती है इसलिए इसे 6 रीजनल क्षेत्रों में बाँटा भी गया है। कोस्टल कर्नाटक, सेंट्रल कर्नाटक, हैदराबाद कर्नाटक, बम्बई कर्नाटक, बेंगलुरु अर्बन एवं ओल्ड मैसूर शामिल है। नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गयी है। चुनाव अभियान शुरू है। लेकिन जो ज़मीनी हकीकत दिखाई दे रही है। उसमें कांग्रेस की तैयारी भाजपा पर भारी है। बोम्मई सरकार के खिलाफ 40% कमीशन, महंगाई, बेरोजगारी, सत्ता विरोधी लहर है। जातीय समीकरण में भी कांग्रेस भाजपा पर भारी है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दलित समुदाय से आते हैं और हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्र से हैं। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कुर्बा समुदाय है और पिछड़ों के बड़े नेता है। सिद्धारमैया 2013 से 2018, 5 वर्ष तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रहे। उन्होंने कई कल्याणकारी योजनाएं जैसे अम्मा भोजनालय चलाया। उनकी छवि एक ईमानदार नेता के रूप में है। डी के शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते है जिसकी आबादी 12% है और 50 से अधिक सीटों पर अहम भूमिका निभाते है। डी के शिवकुमार कांग्रेस के संकटमोचक एवं बेहतर चुनाव प्रबंधक माने जाते है। उनका प्रबंधन कर्नाटक विधानसभा चुनाव में दिखाई भी दे रहा है। लिंगायत समुदाय जिसकी आबादी 18% है के सबसे बड़े नेता भाजपा के बी० एस० येदयुरप्पा हैं। लेकिन पिछले दिनों उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के कारण लिंगायत समुदाय भाजपा से नाराज है। जिसके कारण स्थानीय स्तर पर चुनाव प्रबंधन, प्रत्याशियों के चयन, जातीय समीकरण सब में भाजपा कांग्रेस से कमजोर है। निगाहें मोदी-शाह पर लगी है। चुनाव में यह जोड़ी कैसे और किस तरह भाजपा को जीत दिलाती है। यह किसी चुनौती से कम नहीं होगा।No Url Found





