2023 में होने जा रहे 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव का सेमी- फाइनल होगा। इन 9 राज्यों में 116 लोकसभा और 1083 विधानसभा सीटें आती हैं। चुनाव देश के जिन 9 राज्यों में नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम-पूर्वी भारत, तेलंगाना, कर्नाटक-दक्षिण भारत, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़-मध्य भारत के प्रमुख हिंदी भाषी राज्य हैं। इसलिए 9 राज्यों के चुनाव परिणाम पूरे देश का एक आईना 2024 के लिए होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चुनाव प्रबंधन के मुखिया गृह मंत्री भारत सरकार अमित शाह इसलिए छोटे राज्य से लेकर बड़े राज्यों में चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगाएं हैं। तीन राज्यों के नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा के चुनाव घोषित हो चुके हैं। फरवरी में मतदान और 2 मार्च को चुनाव परिणाम आएंगे। पूर्वी भारत के तीनों राज्य छोटे राज्य है और इनमें मात्र 5 लोकसभा सीटें आती हैं। प्रत्येक राज्य में 60-60 विधानसभा सीटें हैं। इन छोटे राज्यों के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा और असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्वकर्मा की 20 से अधिक जनसभाएं हो चुकी हैं। इनमें त्रिपुरा सबसे अहम् है जहाँ पर 30 वर्षों से जमे वाम दलों को हटा कर भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इस बार भी त्रिपुरा पर जीत के लिए हर चुनावी हथकण्डे अपना रहे हैं।
दक्षिण में कर्नाटक और तेलंगाना जहाँ पर 45 लोकसभा सीटें हैं। यह राज्य भाजपा के लिए बहुत अहम् है। कर्नाटक में राहुल गाँधी की भारत जोड़ों यात्रा में बहुत ज्यादा समर्थन मिलना भी भाजपा के लिए चिंता का विषय है। कर्नाटक राज्य राजनीतिक दलों के लिए आर्थिक रूप से काफी अहम माना जाता है। अगर कर्नाटक में भाजपा की सरकार नहीं बनती तो दक्षिण भारत में भाजपा के बड़ा झटका होगा। तेलंगाना जहाँ भाजपा को संभावनाएं दिख रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, नड्डा लगातार रैलियां कर रहे हैं। कर्नाटक में मई में चुनाव होंगे क्योंकि विधानसभा का कार्यकाल 24 मई को समाप्त हो रहा है।
इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ इन तीन राज्यों में 65 लोकसभा सीटें आती हैं। 2018 में इन तीनों हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस चुनाव जीती थी और सरकार बनाई थी। इसमें मध्य प्रदेश में जोड़-तोड़ करके कांग्रेस की सरकार को गिराया और भाजपा के शिवराज सिंह मुख्यमंत्री हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तमाम प्रयासों के बाद भी अशोक गहलोत और भूपेश बघेल जैसे मुख्यमंत्री को भाजपा मध्य प्रदेश की तरह नहीं हटा पायी। कांग्रेस के यही दो मुख्यमंत्री पार्टी के कार्यक्रम और अन्य राज्यों के चुनाव में आर्थिक से लेकर हर तरह की मदद करते है।





