राहुल एवं अदानी प्रकरण की अग्निपरीक्षा कर्नाटक विधानसभा चुनाव में हो जाएगी। यह चुनाव भाजपा के लिए जितना महत्वपूर्ण है उससे ज्यादा काँग्रेस और गैर भाजपा दलों के लिए भी है। जिस तरह से राहुल गांधी को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान में कर्नाटक में समर्थन मिला था और 2018 के चुनाव में भाजपा से 2% अधिक मत मिले थे। यह 2023 विधानसभा चुनाव के लिए बहुत अहम है। 2% अधिक मत पाने के बाद भी काँग्रेस की भाजपा से 24 सीटें कम थी। भाजपा 36.22% मत के साथ 104 सीटें जीती थी जबकि काँग्रेस 38.4% मत के साथ 80 सीटें जीती। जेडीएस को 37 सीटें एवं 18.36% वोट मिले थे।
2023 में स्थितियाँ 2018 से अलग है। चुनाव परिणाम के बाद वाई एस येदियुरप्पा ने शपथ लिया लेकिन विधानसभा में बहुमत सिद्ध न कर पाने के कारण सरकार गिर गई। काँग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई। गठबंधन की सरकार भी ज्यादा दिन नहीं चली। जोड़-तोड़ कर भाजपा ने येदियुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बना ली। 2 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के बाद येदियुरप्पा को हटा कर बी बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया गया। बोम्मई के नेतृत्व में भाजपा चुनाव लड़ रही है वहीं दूसरी तरफ काँग्रेस के शिव कुमार और सिद्धारमैया है। येदयुरप्पा को अधिक उम्र के कारण हटाया गया था। वह नाराज न हो इसलिए येदयुरप्पा के चहेते को मुख्यमंत्री भी बनाया गया लेकिन येदयुरप्पा के प्रभाव के बिना भाजपा कर्नाटक में कमजोर थी इसलिए 80 वर्षीय येदयुरप्पा को केंद्रीय पार्लियामेन्ट्री बोर्ड में शामिल किया गया।
येदयुरप्पा, लिंगायत समुदाय के काफी प्रभावशाली एवं बड़े नेता हैं। कर्नाटक में 14% लिंगायत की आबादी है आर्थिक रूप से सम्पन्न लिंगायत समुदाय कर्नाटक में लगभग 100 सीटों को प्रभावित करता है। वोक्कालिंगा 11% तथा दलित 19.5 तथा अनुसूचित जनजाति 7, आँय ओबीसी तथा मुस्लिम 16-16% है। मुस्लिम 95% काँग्रेस के साथ है। जिसके कारण भाजपा के हिन्दुत्व को मुस्लिम वोट बैंक बैलेन्स करता है। वोक्कालिंगा के प्रभाव वाली जेडीएस की अहम भूमिका हो जाती है। जातीय एवं धार्मिक समीकरण के अनुसार ही भाजपा काँग्रेस और जेडीएस के विधायक चुने जाते हैं।
राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अदानी को मदद पहुंचाने और उन्हें बचाने का गंभीर आरोप लगा रहे है जबकि 2019 में कर्नाटक में दिये गये भाषण के आरोप में सूरत के कोर्ट ने राहुल को 2 वर्ष की सजा दी जिसके कारण उनकी लोकसभा सदस्यता चली गई। राहुल के सदस्यता जाने और अदानी मोदी के गठजोड़ के बीच कर्नाटक में चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव परिणाम 2024 के लिए अहम हैं किसके पक्ष में होगा यह तो 13 मई को पता चलेगा लेकिन भाजपा हारती है तो विपक्ष का प्रभाव बढ़ेगा। 2024 में मोदी को विपक्ष से कड़ी चुनौती मिलेगी और अगर भाजपा जीत गई तो विपक्ष के लिए 2024 में मोदी को हराने की चुनौती बहुत बढ़ जाएगी।





