राजेन्द्र द्विवेदी- महाराष्ट्र चुनाव परिणाम से मराठा सरदार शरद पवार तथा हिंदुत्व के पुरोधा बालासाहब के पुत्र उद्धव ठाकरे को करारा झटका लगा है। कांग्रेस की स्थिति लोकसभा की तुलना में कमजोर हुई है लेकिन राष्ट्रीय दल है, उसकी सियासत पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं लड़ेगा। शरद पवार और उद्धव ठाकरे के सामने राजनीतिक संकट भी पैदा हो गया है। चुनाव परिणाम आने के पहले जो राजनीतिक हालात थे और मतदाताओं की बातचीत और सर्वे रिपोर्ट थी उसके अनुसार महायुति, महाविकास अघाड़ी के बीच जबरदस्त टक्कर है। लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा जाता था कि अजीत पवार द्वारा चाचा शरद पवार को धोखा देने से मराठा और एनसीपी समर्थकों में नाराजगी है। लोकसभा चुनाव में यह दिखाई भी दिया। शरद पवार को 9 और अजीत को 1 सीट मिली। इसी तरह शिंदे को 7 और उद्धव को 9 संसदीय सीटों पर विजय हासिल हुई थी। अजीत और शिंदे दोनों को पार्टी का सिंबल और असली पार्टी की मान्यता आयोग ने दी थी जबकि पवार और उद्धव को नया सिंबल मिला था।
नए सिंबल पर अधिक सीटें मिलने से यह कहा जा रहा था कि यह जीत पार्टी की नहीं बल्कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे की व्यक्तिगत लोकप्रियता के कारण हुई है क्योंकि पार्टी और चुनाव चिन्ह इनके पास नहीं थी। लोकसभा को आधार मान कर विधानसभा में तर्क दिए जा रहे थे कि नई पार्टी और नए चुनाव चिन्ह पर पवार और उद्धव ज्यादा ताकतवर निकले। विधानसभा में भी ऐसा ही रहेगा। जहाँ तक कांग्रेस की बात है उसे लोकसभा में सभी दलों से अधिक 13 सीटें मिली जिसके आधार पर ही विधानसभा में भी 104 सीटों पर लड़ी थी। चुनाव घोषणा के बाद राजनीतिक विश्लेषक जनता का रुख देखकर यह मान रहे थे कि माझी लड़की बहिन योजना से महायुति को महिलाओं का समर्थन मिलेगा लेकिन किसानों की नाराजगी, मराठा आन्दोलन महायुति पर भारी भी पड़ सकती है। इसलिए चुनाव काफी रोचक एवं मुकाबले वाला है। 23 नवंबर को आये चुनाव परिणाम ने सारे कयासों, राजनीतिक समीक्षा और सर्वे पर विराम लगा दिया। महायुति को 230 सीटें मिली जिसमें भाजपा को 132, शिंदे को 57 और अजीत की 41 सीटें शामिल है। महाघडी के करारा घटका है क्योंकि तीनों दलों को मिला कर 48 सीटें हुई। जिनमें 20 उद्धव 16 कांग्रेस 10 शरद पवार और 2 सीटें सपा की शामिल है। महाविकास अघाड़ी के किसी दल को 10% सीटें नहीं मिली इसलिए नेता प्रतिपक्ष का पद भी महाविकास अघाड़ी के पास नहीं रहेगा। अप्रत्याशित परिणाम मिलने के बाद महायुति में पुराने तीनों चेहरे देवेन्द्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजीत पावर मिलकर सरकार चलायेंगे। फर्क इतना है कि चुनाव के पहले शिवसेना तोड़ कर आये एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे और देवेन्द्र फडणवीस और अजीत पवार उपमुख्यमंत्री रहे। 132 सीटें पाने के बाद स्थितियां बदली हैं और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री और तमाम नाराजगी के बाद एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री बने और अजीत पवार 5वीं उपमुख्यमंत्री बने है। सरकार के सामने चुनौतियां भी बहुत है लेकिन सियासत में शरद पवार और उद्धव ठाकरे के राजनीतिक भविष्य खतरे में है।






