राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने घटती जनसंख्या पर चिंता जाहिर की है। यह उचित है लेकिन जनसँख्या बढ़ाने के लिए बिहार मॉडल अपनाना होगा। संघ प्रमुख ने 3 बच्चा पैदा करने का आवाहन किया है। उस मानक को बिहार पूरा कर रहा है। इसलिए बिहार राज्य को जनसंख्या के मामले में मॉडल बना कर उसे सम्मानित करना चाहिए। इकोनॉमिक सर्वे 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में प्रत्येक महिला औसत 3 बच्चे पैदा करती है। प्रजनन दर 3 है जबकि दूसरे स्थान पर मेघालय 2.9 और तीसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश जहां पर प्रति महिला औसत 2.4 बच्चे पैदा होते हैं। इसके आलावा झारखंड में प्रजनन दर 2.3 तथा मध्य प्रदेश, राजस्थान में 2 है। उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में प्रजनन दर बिहार की तुलना में काफी कम है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु में औसत प्रजनन दर 1.7 है। जबकि कई छोटे राज्य व केंद्र शासित प्रदेश जिसकी प्रजनन दर बिहार की तुलना में आधी है।
इसलिए दक्षिण भारत के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू एवं स्टालिन ने अधिक से अधिक बच्चा पैदा करने के लिए जनता में प्रोत्साहन शुरू कर दिया है। कई ऐसे पुराने कानून जिनमें 2 बच्चे से अधिक बच्चा होने पर पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, उसे बदल रहे हैं। जिससे कि दो बच्चे से अधिक पैदा करने वाले पंचायत चुनाव लड़ने से वंचित न रहें। भारत जैसे विकासशील देश के लिए जनसंख्या संतुलन भी बहुत जरुरी है क्योंकि अगर संतुलन बिगड़ा तो देश के सामने बहुत बड़ा संकट पैदा हो जायेगा।
वर्तमान में असंतुलित जनसंख्या ग्रोथ ने देश के सामने चुनौती भी पैदा कर दी है। दक्षिण राज्यों में जहाँ प्रजनन दर कम है वहां 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। क्योकि जनसँख्या का संतुलन बिगड़ गया है। जहां प्रजनन दर 2 से कम है वहाँ 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों की संख्या 16% से अधिक हो गयी है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों की संख्या 15% से अधिक हो गयी है। इसलिए इन राज्यों के मुख्यमंत्री चिन्तित है। अगर यही प्रजनन दर रहती है तो 2047 तक जब देश आजादी के 100 वर्ष का जश्न मना रहा होगा तो उस समय कम प्रजनन दर वाले राज्यों में 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों की संख्या एक तिहाई हो जाएगी। बिहार और उत्तर प्रदेश जहाँ सर्वाधिक आबादी है ऐसे राज्यों में पहले से ही आबादी और प्रजनन दर दोनों अधिक होने के कारण 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों की संख्या 7-8 % है। दोनों तथ्य, प्रजनन दर बढ़ाना और बढ़ती हुई जनसंख्या पर अंकुश लगाना जरुरी है। देश के राजनीतिक दलों को देशहित में इस जनसंख्या और प्रजनन के असंतुलित दर को ठीक करने के लिए कानून बनाना चाहिए। जिन राज्यों में प्रजनन दर कम है और 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों की संख्या अधिक है वहां जनसँख्या का प्रोत्साहन और जहाँ प्रजनन दर और जनसख्या दोनों अधिक है उस पर भी संतुलन बनाने के लिए कड़ाई से कानून बनाना चाहिए। यह गंभीर समस्या है।
2023-2024 की इकोनॉमिक रिपोर्ट के अनुसार प्रजनन दर-
आंध्र प्रदेश 1.7 , अरुणाचल प्रदेश 1.8, असम 1.9, बिहार 3.0, दिल्ली 1.6, गोवा 1.3, गुजरात 1.9, हरियाणा 1.9, हिमाचल प्रदेश 1.7, जम्मू और कश्मीर 1.4, कर्नाटक 1.7, केरल 1.8, मध्य प्रदेश 2.0, महाराष्ट्र 1.7, मणिपुर 2.2, मेघालय 2.9, मिज़ोरम 1.9, नागालैंड 1.7, ओडिशा 1.8, पंजाब 1.6, राजस्थान 2.0, सिक्किम 1.1, तमिलनाडु 1.8, त्रिपुरा 1.7, उत्तर प्रदेश 2.4, पश्चिम बंगाल 1.6, छत्तीसगढ़ 1.8, झारखण्ड 2.3, उत्तराखंड 1.9, तेलंगाना 1.8, अंडमान और निकोबार (यूटी) 1.3, चंडीगढ़ (यूटी) 1.4, दादरा और नगर हवेली और दमन दीव (यूटी) 1.8, लक्षद्वीप (यूटी) 1.4, पुडुचेरी (यूटी) 1.5, लद्दाख (यूटी) 1.3






