प्रयागराज महाकुंभ एक ऐसा पर्व है जो महीने भर से अधिक चलता है, जिसमें करोड़ों लोग संगम में स्नान करते हैं। बदलते समय के साथ हर महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2025 महाकुंभ में भी योगी सरकार का दावा था कि 40-45 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, और इसी को ध्यान में रखते हुए 100 करोड़ श्रद्धालुओं की व्यवस्था की गई थी। 13 जनवरी से 3 फरवरी (बसंत पंचमी) तक 38 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं। आंकड़ों की गणना कैसे होती है और इसे करोड़ों में बताया जाता है, इस पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
यदि 2011 के आधिकारिक जनसंख्या आंकड़े (110 करोड़) को आधार मानें तो लगभग 34% आबादी यानी हर तीसरा व्यक्ति संगम स्नान कर चुका है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार यदि 140 करोड़ की आबादी को आधार मानें, तो देश का हर चौथा व्यक्ति संगम स्नान कर चुका है। इन आकड़ों की गणना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और महाकुम्भ मेला से जुड़े अधिकारी बधाई के पात्र है जिन्होंने इतना तथ्यात्मक आकड़ा जारी किया है। इन आकड़ों का आधार क्या है यह तो व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और सरकार को ही पता होगा।
निश्चित रूप से करोड़ों का बजट खर्च करके महाकुंभ में की गई व्यवस्थाएं सराहनीय हैं, जिसमें पाकिस्तान समेत दुनिया के 50 से अधिक देशों के लोगों ने संगम में स्नान किया और व्यवस्थाओं की सराहना भी की। लेकिन इन उपलब्धियों के बीच मौनी अमावस्या की रात (28-29 जनवरी) को हुई भगदड़ पूरी व्यवस्था पर काला धब्बा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मौत हुई और 60 घायल हुए हैं। यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि प्रदेश सरकार और विपक्ष के नेताओं के बीच मृतकों की संख्या को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और मृतकों की संख्या पर दिए जा रहे बयान गैरजिम्मेदार है। इन बयानों को लेकर जनता के बीच संशय बना हुआ है क्योंकि 29 जनवरी के बाद घायलों और मृतकों की संख्या को लेकर सरकार द्वारा कोई आधिकारिक अपडेट नहीं दिया। सोशल मीडिया, विभिन्न चैनलों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मृतकों और घायलों की संख्या सरकारी दावों से कहीं अधिक हो सकती है।
प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा तीन स्थानों संगम नोज इलाके, ओल्ड जीटी रोड और झूंसी साइड के ऐरावत द्वार पर भगदड़ की घटनाओं के वीडियो और बयान सामने आ रहे हैं। अगर वह सब सही हैं, उन सब की अधिकृत पुष्टि तो नहीं की जा सकती लेकिन बहुत सारे प्रत्यशदर्शी, मीडिया और सोशल मीडिया द्वारा दिखाए जा रहे तीन स्थानों की घटना से यह कहा जा सकता है कि निश्चित रूप से सरकारी दावों से अधिक मृतक और घायल होंगे। हालांकि योगी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग कर भगदड़ स्थल से श्रद्धालुओं के सामान को हटाया, घायलों को अस्पताल पहुंचाया और मृतकों को मोर्चरी में भेजा।
इसी त्वरित करवाई और एक ही घटना बताये जाने, घायलों और मृतकों की संख्या तथा संगम में 38 करोड़ स्नान करने वाले की संख्या को लेकर जो आकड़ें सरकार द्वारा जारी किये जा रहे है। उस पर ही जनता एवं विपक्ष सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि संगम आए 38 करोड़ श्रद्धालुओं की सही गणना संभव है, तो मृतकों और घायलों के भी सही आंकड़े क्यों नहीं बताए जा सकते ? 29 जनवरी के बाद कोई भी अपडेट नहीं दिया गया। मीडिया को मोर्चरी और अस्पतालों में जाने से रोका जाना, सभी पीपे पुलों को न खोलना, और घटना के बाद भी वीआईपी स्नान जारी रखना सरकार के निर्णयों पर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। यहाँ कई सवाल उठ रहे हैं। कि आखिर 3 स्थानों पर घटनाएं हुई जिसके वीडियो प्रत्यक्षदर्शी एवं मीडिया और सोशल मीडिया पर दिखाए जा रहे हैं तो सरकार एक ही घटना का जिक्र क्यों कर रही है?
दूसरा, 30 पीपे पुल बनाए गए हैं। जब इतनी भीड़ थी तो उन सभी पुलों को खोला क्यों नहीं गया ? मीडिया को मोर्चरी और अस्पतालों में जाने से रोका क्यों गया? घटना के बाद भी वीआईपी स्नान जारी रहा, जबकि सरकार ने तत्काल घोषणा की थी कि वीआईपी स्नान बंद कर दिए गए हैं।
विपक्ष और जनता के इन सवालों पर सरकार द्वारा कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की जांच के लिए न्यायिक और प्रशासनिक आयोग का गठन कर जांच शुरू करा दी है। उन्होंने साजिश की आशंका भी व्यक्त की है। दूसरी ओर, प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित पूरा विपक्ष महाकुंभ की घटनाओं पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। सरकार पर मृतकों की संख्या छुपाने का आरोप लगाते हुए सड़कों से लेकर संसद तक विरोध किया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने तो संसद में तीखी टिप्पणी करते हुए यहां तक कहा कि यदि योगी आदित्यनाथ के आरोप गलत साबित होते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे। कुल मिलाकर महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, जहां करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। एक बड़ा श्रद्धा का केंद्र संगम है। लेकिन इस सब से हटकर यदि निष्पक्षता से समीक्षा की जाए तो कुम्भ की घटना और मृतकों की संख्या पर सियासत ज्यादा हो रही है।
पीड़ितों को मुआवजा दिलाने में सरकार और विपक्ष दोनों गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं। जब तक मृतकों और घायलों की सही संख्या, नाम और पते नहीं होंगे, तब तक उन्हें आर्थिक सहायता कैसे दी जाएगी? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों को 25 लाख रुपये आर्थिक मदद देने की घोषणा की है और आयोग का गठन कर दिया है। लेकिन जिस तरह से जांच प्रक्रिया शुरू हुई है, उस पर भी विपक्ष जांच के नाम पर लीपापोती का आरोप लगा रहा है।
योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेता जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस तरह से सियासत हो रही है, उसे देखते हुए क्या मृतकों की सही संख्या सामने आएगी और उन्हें आर्थिक सहायता मिल पाएगी या नहीं? सत्ता में जो भी सरकार होती है, वह अपनी कमियों को छुपाने का प्रयास करती है यहीं पर विपक्ष और मीडिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है।
सरकार जो छुपा रही है उन तथ्यात्मक जानकारी आकड़ों को सामने लाये। महाकुम्भ में घटित घटना में जिस तरह से सियासत हो रही है लग रहा है मृतकों की संख्या के सही आकड़ें न आ पाने के कारण 25 लाख के आर्थिक सहायता से वंचित हो जायेंगे। मीडिया और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वह मृतकों के संख्या सामने लाएं। उत्तर प्रदेश जहाँ के सर्वाधिक श्रद्धालु महाकुम्भ में आते हैं। सभी मृतक परिवारों को लाभ मिले इसके लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव जिनका बूथ स्तर तक संगठन है उन्हें अपने संगठन के माध्यम से पीड़ित परिवारों के संख्या सही जानकारी के साथ सामने लाना चाहिए । यही स्थिति कांग्रेस व अन्य प्रमुख क्षेत्रीय दलों के लिए लागू होती है वह भी अपने-अपने राज्य के मृतक परिवारों की जानकारी सार्वजनिक करें जिससे उन्हें 25 लाख का मुआवजा मिल सके। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि मृतक परिवारों से उन्हें सहानुभूति कम है और सियासत ज्यादा कर रहे हैं।
सरकार जो तथ्यात्मक जानकारी और आंकड़े छुपा रही है, उन्हें सामने लाना चाहिए। महाकुंभ में घटित घटना में जिस तरह से सियासत हो रही है, उससे लगता है कि मृतकों की सही संख्या सामने न आने के कारण कई पीड़ित परिवार आर्थिक सहायता से वंचित रह जाएंगे।
मीडिया और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि वे मृतकों की सही संख्या उजागर करें। उत्तर प्रदेश, जहां से सबसे अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में आते हैं, वहां सपा मुखिया अखिलेश यादव, जिनका बूथ स्तर तक मजबूत संगठन है, उन्हें अपने संगठन के माध्यम से पीड़ित परिवारों की सही जानकारी जुटाकर सामने लानी चाहिए ताकि मृतक परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा मिल सके। लेकिन ऐसा संभव नहीं लग रहा है क्योंकि मृतक परिवारों के प्रति सहानुभूति कम सियासत ज्यादा कर रहे हैं।






